फूल

​फूल में तेरे लिए हर रोज लाया हूँ

 प्यार में तेरे  दिवाना मैं बनाया हूँ
खूबसूरत तू बहुत है इसलिये तो मैं 

प्रान की बाजी लगा कर आज आया हूँ
आग ऐसी आज दिल में जो लगाई है

छोड़ कर मैं यह जमाना कुँवारा हूँ
जब न भायेगा इश्क तेरा किसी को तब

जुल्म दुनियाँ के सभी मैं आज सहता हूँ
मेहबूबा की अदा अब हो गयी ऐसी

आज उसका मैं सदा को ही नजारा हूँ

     करिए❤❤❤❤❤आह में मेरी समाया करिए           रोज हर अंजन लगाया करिएहोठ पर मेरे मुस्करा कर तुम            चाँद बन मुझको सजाया करिएबन मोहन सपनों में आया करिए            नीदें मेरी सलोनी बनाया करिएमुरली मधुर – मधुर मंद बजा कर             रग- रग मेरी रास मचाया करिएविकल हिरदय का बन जा तू साज       सभल कर रह न भूल जा तू आजतब तक ही रख तू अपनी देह का मोह        जब तक न जाये तेरी यह लाजजीवन वही कहलाता खास         दुख दरद में कोई हो पासचलता गया जो अपने पैर         वह बुढापा बस आये रासडॉ मधु त्रिवेदी 

गजल

तू हवा है तेरी मैं हिफाजत नहीं कर पाऊँगा
      तू चली छोड़  मैं रूखसत नही कर पाऊँगा
जिन्दगी में है ओर भी चाह रखने वाले मुझसे

       आपसे मुहब्बत की  हिमाकत नही कर पाऊँगा
जो सजी हो डोली तेरी दूसरे जहाँ जाने के लिए

        साथ निभाने की पूरी हसरत नहीं कर पाऊँगा
खूब इज्जत बख्शी पूरा करने को ख्वाहिश

        तेरी खुशी की मैं खिलाफत नही कर पाऊँगा
तू खिला हुआ गुलदस्ता है अपने इस चमन का

       बागवाँ से तोड़ने की मैं शरारत नही कर पाऊँगा
एक नया जहाँ बसायेंगी तू यहाँ से हो विदा

        मैं तेरे लिए हुस्न की इबादत नही कर पाऊँगा
याद आयेगी लोट आने की बाबुल के घर जब

         तुझको ना लाने की वकालत नहीं कर पाऊँगा

डॉ मधु त्रिवेदी 

नहीं चाहिए स्कूटर बाइकनही चाहिए घोड़ा -गाड़ी नहीं मोटर साइकिल बस दे दो ऊँटये राजस्थान है रेगिस्तान का जहाज है मीलों दूर ले जाता है ले चलो बस ऊँट सेराजपूताना की शानजहाँ चाहे ले जाता सबको रेतीलें मार्गों पर बढ़ताले चलो बस ऊँट सेजल्दी से अब बताओ कितने आना चाहिए जाना है इसकी सवारी ले चलो बस ऊँट सेडॉ मधु त्रिवेदी 

नही चाहिए

नहीं चाहिए स्कूटर बाइक

नही चाहिए घोड़ा -गाड़ी 

नहीं मोटर साइकिल 

बस दे दो ऊँट
ये राजस्थान है 

रेगिस्तान का जहाज है 

मीलों दूर ले जाता है 

ले चलो बस ऊँट से
राजपूताना की शान

जहाँ चाहे ले जाता सबको 

रेतीलें मार्गों पर बढ़ता

ले चलो बस ऊँट से
जल्दी से अब बताओ 

कितने आना चाहिए 

जाना है इसकी सवारी 

ले चलो बस ऊँट से
डॉ मधु त्रिवेदी 

लीक से हटकर

​❤लीक से हट कर

@@@@@@
कुछ अलग लिखा जाये

लीक से हट कुछ किया जाये

विषमता में समानता लाकर

हर व्यक्ति को खुशहाल किया जाये

कर रहे है जो देश को खोखला

उनका काम तमाम किया जायें

भारत में ही रहते है 

यहीं फलते फूलते

असहिष्णुता जैसे बयान देते है

उनको देश से बाहर किया जाये
ऊपर से नीचे तक जो गन्दगी 

उसको साफ किया जायें

सत्ताधारियों के बीच साक्षरता 

स्तर को बढ़ाया जायें 

सी एम जैसे पदों को

पढे लिखों से 

गौरवान्वित किया जाये

सब लोगों को मिलें नौकरी 

ऐसा कुछ किया जायें
बड़े बूढ़े हो समृद्ध 

मिलें बच्चों की छत्र छाया

ऐसे संस्कार दिये जायें

रहे न कोई भूखा नंगा

दो वक्त की रोटी मिले सबको

ऐसा इन्तजाम किया जाये

चाँद तारों से करे बातें

ऐसा काम किया जायें
डॉ मधु त्रिवेदी

हाइकू

कैसे सुंदर 

रंगों से रंगा हुआ

जग जीवन
एक रंग को

ओर दे दो मुझको

उधार तुम
इन्द्रधनुषी 

सा बन सतरंगा

फैले जग में
इस रंग से

जगमग  हो जाए

जग जीवन
लाल रंग से

बहके यूँ यौवन

खिले जीवन
महक जाये

जीवन फुलवारी

शोभा हो न्यारी
झंझावात है

जीवन तूफान है

मन क्लान्त है
दर्द तू पी लें

आबाद कर दे तू

पूरे जहाँ को
प्रसन्नता दे

फूलों सी सबको तू

मुस्कराहट
डॉ मधु त्रिवेदी