Monthly Archives: July 2017

प्यार तेरा

पियार तेरा बना रहेगा 

खियाल तेरा जगा रहेगा
बरस जो सावन रहा घिरा है

जिगर ए आशिक जला रहेगा
जलें जमीं ताप जब उगलती

तो शीत ठन्डक सदा रहेगा
जो आग लगती जिया में तेरे

तलाश जल की बना रहेगा
बने मिरा दिल कभी किसी का

जगा ए रौशन शमा रहेगा
सभी गमों को पिया है तूने

मगर सभी पर दिला रहेगा
बंधन सभी तोड़ कर जहाँ के 

मिरा तिरा अब पटा रहेगा

डॉ मधु त्रिवेदी 

भेद मन के 

भेद मन के सभी दूर कर

जो प्रभू ने दिया कर  बसर
आस जब टूटती है तिरी

इन्तजारे सुबह तू कर 
कामयाबी मिलेगी तुझे 

रात दिन काम में तू ठहर 
जिन्दगी हो गयी है कठिन

सीख कोई अभी ले हुनर 
मन तिरा हो गया बावला

आज पन्छी बना कर शजर
तू सयानी दिखे जब मुझे 

इसलिए तो रखो आज वर 
राजरानी बनेगी तभी 

रोज हर तू मुझे प्यार कर 
मोहिनी तू पिलाये जो मुझे 

इस जहाँ में मुझे कर अमर 
डॉ मधु त्रिवेदी