Monthly Archives: May 2017

दर्द में हूँ

दर्द में हूँ जरा दुआ रखना
आग दिल में लगी बुझा रखना
अत़्फ पाकर ढुलक रहे आँसू
आज बीमार को दवा रखना 
 जिन्दगी है मजी़द के हाथों

हाल में हर बना नफ़ा रखना
बाब तेरा खुदा लिखे जब तो

हर कदम शीश को झुका रखना
 खाक में साँस जब मिले तब

नाम मेरा जहाँ बना रखना
बन गया तू अ़जीम सा किस्सा

 लोक में दिल न अब दुखा रखना
प्यार से बात तुम किये रखना

छोड़ जाऊँ न तुम खता रखना
अत़्फ ~~दया, प्रेम

मज़ीद ~~दो -दो चार करने वाला

बाब ~~अध्याय/पाठ

खाक ~~~मिट्टी /धूल

अ़जीम ~~महत्वपूर्ण
डॉ मधु त्रिवेदी

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