Monthly Archives: February 2017

दोस्ती 

दोस्ती 
सांस- सांस पिरो कर

जो ताना बाना बुना था

आज यदि भेट कर दूँ 

को कम है 
यह जन्म छोड बार – बार

जन्म लेने पड़े तो सब

भेंट स्वरूप तुझको मैं 

अर्पित कर दूँ
साँस तो फिर मिल जायेगी 

मगर हर जन्म में तू हो 

या न हो इसलिये 

मित्र हर पल हर क्षण
आज मेरा प्रण मेरा जतन 

अपनी साँस मात्र देने का

जीवन उत्सर्ग करने का है 

बार – बार अपने को 
मैं खुश हूँ आज 

मेरी देह जो मात्र ख्वाहिशों 

का पुलन्दा है 

बस तेरी साँस में बसेगी
धन्य हूँ मैं धन्य हूँ दोस्त

रूह बन पास तेरे 

आती रहूँगी 

और धूल बन कदमों 

तले आती रहूँगी
डॉ मधु त्रिवेदी

रोज डे अपना मनाती शायरी

​रोज डे अपना मनाती शायरी

साथ तेरा फिर मिलाती शायरी
पास मुझको जब बुलाता रोज तू

भाव सुंदर तब जगाती शायरी
बात दिल मेरा कहे जब आपसे 

आह में तेरी समाती शायरी
जब मुझे प्रपोज करता वो तभी

 प्यार भंगिमा से सजाती शायरी
वीक वैलेंटा मना कर यहाँ

 जिन्दगी को राह लाती शायरी
प्रेम हो जाये किसी से जब कभी

रात में नींदें उड़ाती शायरी
हो गये पागल इश्क में अब सभी 

तब सदा खुद को भुलाती शायरी
जब नजर से मिल नजर हो एक तब

आशिकों को यूँ सताती शायरी
बेवफा जब आपसे कोई करे

मौत युगलों को दिलाती शायरी

फूल

​फूल में तेरे लिए हर रोज लाया हूँ

 प्यार में तेरे  दिवाना मैं बनाया हूँ
खूबसूरत तू बहुत है इसलिये तो मैं 

प्रान की बाजी लगा कर आज आया हूँ
आग ऐसी आज दिल में जो लगाई है

छोड़ कर मैं यह जमाना कुँवारा हूँ
जब न भायेगा इश्क तेरा किसी को तब

जुल्म दुनियाँ के सभी मैं आज सहता हूँ
मेहबूबा की अदा अब हो गयी ऐसी

आज उसका मैं सदा को ही नजारा हूँ