Monthly Archives: December 2016

गजल

तू हवा है तेरी मैं हिफाजत नहीं कर पाऊँगा
      तू चली छोड़  मैं रूखसत नही कर पाऊँगा
जिन्दगी में है ओर भी चाह रखने वाले मुझसे

       आपसे मुहब्बत की  हिमाकत नही कर पाऊँगा
जो सजी हो डोली तेरी दूसरे जहाँ जाने के लिए

        साथ निभाने की पूरी हसरत नहीं कर पाऊँगा
खूब इज्जत बख्शी पूरा करने को ख्वाहिश

        तेरी खुशी की मैं खिलाफत नही कर पाऊँगा
तू खिला हुआ गुलदस्ता है अपने इस चमन का

       बागवाँ से तोड़ने की मैं शरारत नही कर पाऊँगा
एक नया जहाँ बसायेंगी तू यहाँ से हो विदा

        मैं तेरे लिए हुस्न की इबादत नही कर पाऊँगा
याद आयेगी लोट आने की बाबुल के घर जब

         तुझको ना लाने की वकालत नहीं कर पाऊँगा

डॉ मधु त्रिवेदी 

नहीं चाहिए स्कूटर बाइकनही चाहिए घोड़ा -गाड़ी नहीं मोटर साइकिल बस दे दो ऊँटये राजस्थान है रेगिस्तान का जहाज है मीलों दूर ले जाता है ले चलो बस ऊँट सेराजपूताना की शानजहाँ चाहे ले जाता सबको रेतीलें मार्गों पर बढ़ताले चलो बस ऊँट सेजल्दी से अब बताओ कितने आना चाहिए जाना है इसकी सवारी ले चलो बस ऊँट सेडॉ मधु त्रिवेदी 

नही चाहिए

नहीं चाहिए स्कूटर बाइक

नही चाहिए घोड़ा -गाड़ी 

नहीं मोटर साइकिल 

बस दे दो ऊँट
ये राजस्थान है 

रेगिस्तान का जहाज है 

मीलों दूर ले जाता है 

ले चलो बस ऊँट से
राजपूताना की शान

जहाँ चाहे ले जाता सबको 

रेतीलें मार्गों पर बढ़ता

ले चलो बस ऊँट से
जल्दी से अब बताओ 

कितने आना चाहिए 

जाना है इसकी सवारी 

ले चलो बस ऊँट से
डॉ मधु त्रिवेदी 

लीक से हटकर

​❤लीक से हट कर

@@@@@@
कुछ अलग लिखा जाये

लीक से हट कुछ किया जाये

विषमता में समानता लाकर

हर व्यक्ति को खुशहाल किया जाये

कर रहे है जो देश को खोखला

उनका काम तमाम किया जायें

भारत में ही रहते है 

यहीं फलते फूलते

असहिष्णुता जैसे बयान देते है

उनको देश से बाहर किया जाये
ऊपर से नीचे तक जो गन्दगी 

उसको साफ किया जायें

सत्ताधारियों के बीच साक्षरता 

स्तर को बढ़ाया जायें 

सी एम जैसे पदों को

पढे लिखों से 

गौरवान्वित किया जाये

सब लोगों को मिलें नौकरी 

ऐसा कुछ किया जायें
बड़े बूढ़े हो समृद्ध 

मिलें बच्चों की छत्र छाया

ऐसे संस्कार दिये जायें

रहे न कोई भूखा नंगा

दो वक्त की रोटी मिले सबको

ऐसा इन्तजाम किया जाये

चाँद तारों से करे बातें

ऐसा काम किया जायें
डॉ मधु त्रिवेदी

हाइकू

कैसे सुंदर 

रंगों से रंगा हुआ

जग जीवन
एक रंग को

ओर दे दो मुझको

उधार तुम
इन्द्रधनुषी 

सा बन सतरंगा

फैले जग में
इस रंग से

जगमग  हो जाए

जग जीवन
लाल रंग से

बहके यूँ यौवन

खिले जीवन
महक जाये

जीवन फुलवारी

शोभा हो न्यारी
झंझावात है

जीवन तूफान है

मन क्लान्त है
दर्द तू पी लें

आबाद कर दे तू

पूरे जहाँ को
प्रसन्नता दे

फूलों सी सबको तू

मुस्कराहट
डॉ मधु त्रिवेदी

बुलाना पडा

​❤भटक राह वो जब गया तो उसे फिर

हमें आज वापस बुलाना पड़ा है
सदा भूलता रीति परिवार की तो 

उसे याद फिर से दिलाना पड़ा है
उसे जब अदा ये नहीं रास आती 

तभी साथ मेरा गंवाना पड़ा है
सभी ने जमा धन किया है  जो काला 

तभी तो सभी को जताना पड़ा है
शमा याद कर जब विरह में जली तब

सबक प्यार का फिर सिखाना पड़ा है
कठिन था बहुत प्यार की राह चलना

तभी तो वजूद यह मिटाना पड़ा है
बसाया हमें इस जमीं पर खुदा ने 

तभी याद सबको दिलाना पड़ा है

​☀22    22    22      22   2 2 

चाहत के मकान में तुम रहती हो

दिल के दरपन में तुम  फबती हो 
जब पहने हीरे का हार गले में 

 नभ में बिजुली सी मुझको लगती हो 
नजरें झुकी झुकी हो जब तेरी 

अदा इसी में  दिल मेरे खिलती हो
मुस्काँ  प्रिया जो तेरे  होठों पर 

बगिया में फूल की तरह सजती हो 
नित्य चली आती हो जब सपने में 

ख्यावों सी उठ ख्यालों में नचती हो