Monthly Archives: July 2016

हाइकू

​(वर्षा -सुन्दरी )
झनन -झन 

    झनकाती घुघरूँ

पहन के वो
पाजेब भारी 

    ठुमकती आ रही 

वर्षा सुन्दरी
मधु स्मित सी

   भर के मधु मुस्काँ

लजाती खड़ी
हरी -भरी हो

   धरा  प्यास बुझाती 

मन रिझाती
मेघा घिरे है 

   घरर घरर के 

बादलों बीच
हुलसाते है

    तर-बतर तन

मन ठन्डाते
~~डॉ मधु त्रिवेदी ~~

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